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चाणक्य नीति - प्रथमोऽध्यायः श्लोक 09 का अर्थ


धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पंचमः ।
पंच यत्र न विद्यंते न तत्र दिवसं वसेत् ॥ 09 ॥

श्लोक का विवेचन:


धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पंचमः ।

इस श्लोक में कहा गया है कि धनी, श्रोत्रिय, राजा, नदी, और वैद्य - ये पाँच प्रकार के लोग हैं।


पंच यत्र न विद्यंते न तत्र दिवसं वसेत् ॥**

और यहां यह बताया गया है कि जहां ये पाँच प्रकार के लोग नहीं होते, वहां कोई भी व्यक्ति दिन नहीं बिता सकता।


इस श्लोक का सारांश:

यह श्लोक हमें बताता है कि एक स्थान तभी समृद्धि और सुख-शांति से भरा हो सकता है जब वहां धनी, श्रोत्रिय, राजा, नदी, और वैद्य - इन पाँच प्रकार के लोग मौजूद होते हैं। इन पाँचों तत्वों की उपस्थिति से ही समृद्धि और सुरक्षा हो सकती है, जो हमें जीवन में सफलता प्रदान करती हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखने को मिलता है कि एक समृद्धि यukt और सुरक्षित समाज के लिए हमें इन पाँच प्रकार के लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

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